मुहर्रम शायरी और कुइट्स , इमेजेज

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Muharram Wishing Image aur Shayari





मुस्किलो से लड़ना नही बल्कि सम्भल कर
गुजरना
सीखो वरना आप की सख्सियत तबाह हो जाये गी
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न गदा गिरी न तो नगरी ,न सिकंदरि न कलंदरी 
है अजीज मुझ को जहां में फक्त एक  फ्राइज कंबरी
में खुलूश व क़ल्ब व निगाह से हूँ फिजाएं अजमीयत मुर्तुजा
मेरे च कारों में हैं केसरी मेरी ठोकरों में सिकंदरि



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सुनो एक तुमहारे बाद....
किसी से भी मेरी मुहबत
इतनी सदीद नही हो सकती
के मैं उस पर अपनी आना
कुर्बान कर दूं....
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मुझ से वो अक्सर कहती थी
मेरी बस इतनी ख्वाहिश है
कुछ ऐसी पहचानी जाऊं
के आप मे नाम से जानी जॉन







क्या मिला मुहबत से?
ख्वाब की मुसाफत से
रद जद शब राया जत से
किया मिला मुहबत 
एक हिज़्र का शेहरा
एक शाम यादों की
एक थाका हुआ आँशु!!!


कर्बला की शहादत इस्लाम बना गयी
खून तो बहा था लेकिन क़ुरबानी
होंसले की उड़ान देखा गयी



रोने वाला हुँ शहीद ए करबला की याद में
किया दरे मकसद न दें के शाकी कौसर मुझे




अफजल के कुल जहाँ से घराना हुसैन का
नबियों का ताज दार है नाना हुसैन का
एक पल की थी बस हुकूमत यजीद की
सदिया हुसैन की है जमना हुसैन का 



सलाम
सुलतान कर्बला को हमारा सलाम हो
जहीन मुस्तफा की हमारा सलाम हो
अकबर से नोजवँ भी राण में हुए शहीद
हमसकले मुस्तफा को भी हमारा सलाम हो





















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